clix - Ecosystem
     Help Videos
Introduction Adding Buddy Exploring Platform Exploring Units
A-  A  A+

×
×
Profile picture for this group.
New profile photo
×
Ecosystem

Select from the following:

* Use Ctrl + Click to select multiple options

Selections:

×

Lesson 2 : पारिस्थितिक तंत्र को समझना

पारिस्थितिक तंत्र को समझना


पिछले​ दिन हमने अपने स्कूल के आहाते की खोजबीन की थी और हमें उसमें जैविक व अजैविक तत्व मिले थे।

उसे​ याद करने के लिए एक बार दोहरा लेते हैं – जैविक तत्व वे हैं जिनमें जीवन होता है और अजैविक तत्व वे हैं जिनमें जीवन नहीं होता है। किसी विशिष्ट इलाके में रहने वाले सभी पेड़-पौधे, जानवर व सूक्ष्मजीवी और उनके पर्यावरण में मौजूद निर्जीव चीज़ें जैसे मिट्टी, हवा, पानी आदि मिलकर एक परिस्थितिक तंत्र (ecosystem) बनाते हैं।

किसी​ भी परिस्थितिक तंत्र में जैविक और अजैविक घटक एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। मिसाल के लिए, पौधे जीवित रहने और बढ़ने के लिए अपने वातावरण में मौजूद धूप, खनिज और पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह जानवरों को उनका भोजन, पोषण और ऊर्जा पौधों या दूसरे जानवरों को खाकर मिलता है। पौधों, जानवरों व सूक्ष्मजीवियों को जीवित रहने के लिए पानी और हवा की जरूरत होती है जिसे वे अपने वातावरण से लेते हैं।

हम​ इंसान भी इसी परिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं। दूसरे जानवरों की ही तरह हमें भी अपना पोषण जैविक व अजैविक तत्वों से मिलता है। 

परि​स्थितिक तंत्र बहुत बड़ा हो सकता है, जैसे कोई समुद्र या जंगल, लेकिन किसी पेड़ में बना कोटर या किसी फेंके हुए डब्बे में बरसात में जमा हुआ पानी भी एक परिस्थितिक तंत्र है। परिस्थितिक तंत्र के अध्ययन को परिस्थिति-विज्ञान या परिस्थितिकी (ecology) कहते हैं और जो वैज्ञानिक यह अध्ययन करते हैं उनको परिस्थितिकी-विज्ञानी कहते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र के प्रकार

अब ​हम यह जानते हैं कि भले ही हमारे ग्रह के अलग-अलग हिस्से एक दूसरे से भिन्न दिखते हैं लेकिन असल में वे एक अदूसरे से जुड़े हुए हैं। दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाली उथल-पुथल केवल उसी हिस्से तक सीमित नहीं रहती। एक महाद्वीप में चलने वाली हवा दूसरे महाद्वीपों तक जाती है। किसी एक समुद्र में व्याप्त प्रदूषण धीरे-धीरे दूसरे समुद्रों तक पहुंच सकता है और उनमें रहने वाले जीवों को प्रभावित कर सकता है। किसी एक देश के जंगल में लगी आग दूसरे देश में कुहरा पैदा कर सकती है।

 

लेकिन​ हम यह भी पाते हैं कि जहां तक जैविक व अजैविक तत्वों का सवाल है, हमारे पर्यावरण के कई इलाकों की अपनी विशिष्टताएं हैं और वे एक अलग व विशिष्ट परिस्थितिक तंत्र की तरह व्यवहार करते हैं।

 

चलो ​इनमें से कुछ का अध्ययन करें।

[Contributed by administrator on 10. Januar 2018 21:33:14]