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Unit 1: The Earth

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गतिविधि 2: एक वर्ष में सूर्य के पथ में आने वाले बदलाव

ऋतु

क्या आप इन प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं:

  1. ‘ऋतु’ क्या होती है?

  2. भारत में हम कौनसी ऋतुएँ अनुभव करते हैं?

  3. ग्रीष्म ऋतु, मानसून और शीत ऋतु के बीच तीन अंतर लिखिए|

  4. क्या पृथ्वी पर हर जगह ऋतुएँ (खासतौर से ग्रीष्म और शीत) महसूस की जाती हैं?

  5. जब भारत में ग्रीष्म ऋतु होती है तो क्या पूरे विश्व में भी ग्रीष्म ऋतु होती है? अगर नहीं, तो विश्व के विभिन्न हिस्सों में ऋतुएँ अलग-अलग कैसे होती हैं?

  6. पृथ्वी में अलग-अलग ऋतुएँ क्यों होती हैं?

ऋतु वर्ष का एक हिस्सा है जिसमें मौसम, पारिस्थिकी और सूर्य के प्रकाश की मात्रा में बदलाव आता है| भारत में हम एक वर्ष को आमतौर पर तीन हिस्सों में बाँटते हैं: ग्रीष्म ऋतु, मानसून और शीत ऋतु| औसतन तापमान ग्रीष्म ऋतु में अधिक और शीत ऋतु में कम होता है| मानसून वर्षा का समय होता है| मानसून उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की विशेषता है, खासतौर से दक्षिण एशिया की (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इत्यादि) और इसका नाम हिंदी/अरबी के ‘मौसम’ शब्द से आया है| ग्रीष्म और शीत ऋतुएँ पूरे विश्व में अनुभव की जाती हैं| आपने जल-चक्र और वर्षा के बारे में पढ़ा होगा| अब हम सीखेंगे कि ग्रीष्म और शीत ऋतुएँ क्यों आती हैं|

आगे बढ़ने से पहले जरा सोचिए कि गर्मी और सर्दी कैसे पड़ती हैं| आपको क्या लगता है कि ऐसा क्यों है कि साल में कभी ज्यादा गर्म होता है और कभी ज्यादा ठंडा?

इसके दो कारण हैं:

I. दिन और रात की अवधि में बदलाव: क्या आपने गौर किया है कि गर्मियों में सूर्य जल्दी उगता है और देर से अस्त होता है, मगर सर्दियों में वह देर से उगता है और जल्दी अस्त हो जाता है? इस कारण सर्दियों की तुलना में गर्मियों में हमें सूर्य का प्रकाश ज्यादा देर तक मिलता है| सर्दियों में आकाश में सूर्य की गति का वृत्त-चाप छोटा होता है और गर्मियों में लम्बा (चित्र 2)|


 

Changes

चित्र 2: कर्क रेखा पर सूर्य के पथ में बदलाव (बाएं से दाएं: ग्रीष्म अयनांत, विषुव, शीत अयनांत)

                                                         
गतिविधि 2: एक वर्ष में सूर्य के पथ में आने वाले बदलाव

विधि:

  1. अपनी कक्षा में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम चिन्हित कर लें|

  2. अलग-अलग ऋतुओं में आकाश में सूर्य के पथ की नक़ल करने के लिए अपने हाथ को पूर्व से पश्चिम की ओर ले जाएं| क्योंकि हम उत्तरी गोलार्ध में है, इसलिए सूर्य हमेशा आकाश के शीर्षबिंदु के दक्षिण में रहेगा| कर्क रेखा तक के प्रदेश में वर्ष में केवल दो बार ही सूर्य मध्यान्ह के समय सिर के ठीक ऊपर आता है| इसलिए 23.50° अक्षांश से ऊपर किसी भी स्थान पर सूर्य हमेशा आकाश के शीर्षबिंदु के दक्षिण में ही दिखेगा|

II. सूर्य के प्रकाश की प्रबलता में बदलाव: आपने देखा होगा कि गर्मियों में मध्यान्ह के वक्त सूर्य आकाश में काफी ऊंचा दिखता है| मगर सर्दियों में मध्यान्ह के वक्त सूर्य थोड़ा नीचे दिखाई देता है (चित्र 2)| सूर्य की किरणों की प्रबलता सबसे ज्यादा तब होती है जब वे सतह के लम्बवत होती हैं| इसका एक उदहारण लेते हैं| मान लीजिए कि बारिश हो रही है और आप एक बर्तन में पानी जमा करना चाहते हैं| आप बर्तन को कैसे पकड़ेंगे? बारिश की दिशा के लम्बवत (चित्र 3a) या किसी कोण पर (चित्र 3b)? आप सबसे ज्यादा पानी तब इकट्ठा कर पाएंगे जब आप बर्तन को बारिश की दिशा के लम्बवत पकड़ेंगे (जैसा चित्र 3a में दिखाया गया है)| जैसे-जैसे कोण घटेगा, इकट्ठा होने वाले पानी की मात्र भी घटेगी| अगर आप बर्तन को बारिश के समानांतर पकड़ेंगे (जैसा चित्र 3c में दिखाया गया है) तो कुछ भी पानी इकट्ठा नहीं होगा|

                    
Intensity

चित्र 3: प्रबलता आपतन कोण पर निर्भर करती है



यही सूर्य की किरणों पर भी लागू होता है| गर्मियों में जब सूर्य की किरणों और पृथ्वी की सतह (जमीन) के बीच का कोण ज्यादा होता है, तब उस हिस्से पर ज्यादा प्रबल प्रकाश पड़ता है| सर्दियों में जब सूर्य की किरणों और पृथ्वी की सतह के बीच का कोण कम होता है, तब उस हिस्से पर कम प्रबल प्रकाश पड़ता है|

 

इसीलिए गर्मियों में तापमान ज्यादा होता है और सर्दियों में कम| मगर एक वर्ष में सूर्य का पथ बदलता क्यों है?
 

पृथ्वी जिस धुरी पर घूमती है वह 23.50° झुकी हुई है| इसलिए पृथ्वी की धुरी उसकी कक्षा के तल से 66.50° का कोण बनाती है| जैसा कि आप जानते हैं, यह धुरी ध्रुव तारे की दिशा में है| ध्रुव तारा पृथ्वी से बहुत दूर है (443 प्रकाश वर्ष से भी ज्यादा); इसलिए पूरी कक्षा में धुरी की दिशा एक समान रहती है (चित्र 4 देखें)|

 
Earth's

चित्र 4: पृथ्वी की धुरी उसकी कक्षा के तल से 66.50° का कोण बनाती है


जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है (और दक्षिणी गोलार्ध सूर्य से दूर होता है), जैसा चित्र 4 की स्थिति B में दिखाया गया है, तब सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं (चित्र 5 देखें)| दक्षिणी गोलार्ध की तुलना में उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणों का कोण ज्यादा है (90° के करीब)| साथ ही, उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि दक्षिणी गोलार्ध से ज्यादा होगी| यह स्थिति, जब उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि सबसे ज्यादा होती है और जो 21 जून को आती है, ‘ग्रीष्म अयनांत’ कही जाती है|

इस स्थिति में (और इसके तीन माह पहले यानी 20 मार्च से और इस स्थिति के तीन माह बाद यानी 23 सितम्बर तक) उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि 12 घंटे से ज्यादा होगी| इसलिए इस दौरान उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होगी और दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु|

June

चित्र 5: ग्रीष्म अयनांत


ऐसा ही एक चित्र बनाएं जिसमें दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर झुका है और उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर है (चित्र 4 में स्थिति A)| सूर्य की किरणें कहां लम्बवत होंगी? यह स्थिति, जब दक्षिणी गोलार्ध में दिन की अवधि सबसे ज्यादा होती है और जो 22 दिसम्बर को आती है, ‘शीत अयनांत’ कही जाती है|23 सितम्बर से 20 मार्च तक उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि 12 घंटे से कम होती है; इसलिए उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु होगी और दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु|

पृथ्वी की कक्षा में ऐसी दो स्थितियां भी आएंगी जब न तो उत्तरी ध्रुव और न ही दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होगा| इन स्थितियों में भूमध्य रेखा का तल सूर्य के केंद्र से गुजरता है (चित्र 5 में कल्पना कीजिए की सूर्य बाईं ओर के बजाय पृष्ठ के सामने आपके सिर की जगह पर है)2| इन दोनों स्थितियों में दिन और रात बराबर अवधि ( 12 घंटे) के होते हैं| जैसा आप अंदाजा लगा सकते हैं, ऐसा 20 मार्च और 23 सितम्बर को होता है, और इन दो दिनों को ‘विषुव’ कहते हैं|

 

2अगर चित्र 5 की तरह सूर्य की किरणें बाईं ओर से आ रही हैं, तो पृथ्वी की धुरी पृष्ठ के तल के लम्बवत बाहर को आ रही होगी|


 
[Contributed by administrator on 10. Januar 2018 21:24:06]