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Unit 2: The Moon

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चन्द्र मास और नक्षत्र मास

पाठ 5 में आपने चन्द्रमा की गतियों के बारे में सीखा| आपको याद होगा कि चन्द्रमा को पृथ्वी का एक परिक्रमण पूरा करने में 27.3 दिन लगते हैं| मगर पाठ 6 में आपने पढ़ा कि चन्द्रमा को अपनी कलाओं के चक्र को पूरा करने में 29.5 दिन लगते हैं (शुक्ल पक्ष के 15 दिन + कृष्ण पक्ष के 15 दिन)| अगर चन्द्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में 27 दिन लगाता है तो उसे कलाओं का एक चक्र पूरा करने में 29 दिन कैसे लग जाते हैं?

 

आइए इसे और गहराई से समझें| हम पूर्णिमा की रात से चन्द्रमा को देखना शुरु करते हैं| उसकी स्थिति पर नजर रखने के लिए हम नजदीक के एक चमकीले तारे को चिन्हित करते हैं| हम इस तारे को ‘तारा अ’ कहेंगे| अगले दिन चन्द्रमा थोड़ी देर से उदय होगा और ‘तारा ब’ के नजदीक दिखेगा| तीसरे दिन वह थोड़ी और देर से उदय होगा और ‘तारा स’ के नज़दीक दिखेगा| इस तरह चन्द्रमा अलग-अलग तारों के नज़दीक दिखता हुआ अपनी कक्षा में आगे बढ़ता जाता है| जब वह ‘तारा अ’ पर वापस पहुंचता है, तब उसका पृथ्वी का एक परिक्रमण पूरा हो चुका होता है, और हमें पूर्ण चन्द्र दिखना चाहिए| मगर हमें ऐसा नहीं दिखता है! हमें अभी भी बढ़ता हुआ अर्द्धाधिक चन्द्र ही दिखता है| क्योंकि पृथ्वी भी अपनी कक्षा में थोड़ा आगे बढ़ चुकी होती है, इसलिए चन्द्रमा को उस तक पहुंचने में कुछ दिन और लग जाते हैं| कुछ दिन बाद चन्द्रमा सूर्य की ठीक विपरीत दिशा में होता है और तब हमें पूर्णिमा दिखती है| इस बार पूर्णिमा के वक्त चन्द्रमा ‘तारा स’ के नजदीक दिखेगा नाकि पिछली पूर्णिमा की तरह ‘तारा अ’ के नजदीक|

 

आइए इसे समझने के लिए एक गतिविधि करते हैं|


 
[Contributed by administrator on 10. Januar 2018 21:22:28]