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रोशन अपनी मनपसंद शर्ट पहन कर चहकता हुआ अपने दोस्तों के साथ खेलने गया। रोज़ शाम को रोशन और उसके दोस्त साथ मिलकर गली में खेलते थे। आम तौर पर वे
क्रिकेट खेलते थे। हालांकि एक-दो लड़कों ने यह शिकायत की थी, कि रोज़ क्रिकेट खेलने में मज़ा नहीं आता, पर किसी ने भी उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। जिसके पास जो भी सामान था, वह ले आता था। सोनू के पापा लकड़ी के खिलौने बनाते थे। इसलिए, उन्होंने एक अच्छा-सा बैट बनाया ताकि लड़के उसके साथ खेल सकें। रोशन गेंद लेकर आता था और स्टम्प बनाने के लिए करीम ईंटें लाता था। अगर कभी गेंद फट जाती या गुम हो जाती, तो बाकी के लड़के बारी-बारी से नई गेंद ले आते थे। एक शाम सभी लड़के खेलने के लिए आए और फिर से एक लड़के ने शिकायत करते हुए कहा, “अरे यार…..फिर से क्रिकेट नहीं खेलेंगे….. क्यों न हम फुटबॉल खेलें?’’ रोशन ने हँसते हुए जवाब दिया, “तुम क्रिकेट नहीं खेलना चाहते क्योंकि तुम अच्छे बल्लेबाज़ नहीं हो। चलो खेल शुरू करते हैं, हमें देर हो रही है।” उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया। करीम ने गेंद को ज़ोर से मारा और वह रेणु आन्टी के घर में चली गई। लड़कों को यह डर था, कि उन्हें फिर से डाँट सुननी पड़गी। गेंद माँगने के लिए रेणु आन्टी का दरवाज़ा खटखटाने से बेहतर यही था, कि वे उनका गुस्सा ठंडा होने का इंतज़ार करें। वैसे भी उनके पास एक और गेंद खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए वे कुछ देर के लिए पकड़म पकड़ाई खेलने लगे।

[Contributed by ankit.dwivedi@clixindia.org on 25. März 2026 18:48:18]


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