सावन का महीना था। हर तरफ पेड़ों पर फल-फूल आने लगे। राधा और मीना को इमली खाने की इच्छा हुई। वे गाँव के बाहरी हिस्से में लगे एक बड़े पेड़ पर गए। देखते ही देखते वे पेड़ पर चढ़ गए और उन्होंने खूब इमलियाँ खाई। मीना ने एकदम से घड़ी देखी और घबरा कर चिल्लाई, “अरे! स्कूल का टाइम हो गया। जल्दी चलो वरना हैडमास्टर हमें छोड़ेंगे नहीं।” उन सबको कुछ दिन पहले ही हैडमास्टर से डाँट पड़ी थी इसलिए वे घबरा गए।
सभी लड़कियाँ जल्दी-जल्दी पेड़ से नीचे उतरीं और स्कूल की तरफ भागने लगीं। राधा सबसे आखिर में उतरी और उतरते हुए उसके पाँव पर एक काँटा लग गया। वह चिल्लाई, “आह! मीईईई....ना.....! सुनो, मेरे लिए रुको। मुझे चोट लग गई है।” मीना उसकी आवाज़ सुन कर ज़रा देर के लिए रुकी, पीछे मुड़ कर देखा और फिर स्कूल की तरफ भागने लगी। दर्द के मारे राधा के आँसू निकल गए।
सावन का महीना था। हर तरफ पेड़ों पर फल-फूल आने लगे। राधा और मीना को इमली खाने की इच्छा हुई। वे गाँव के बाहरी हिस्से में लगे एक बड़े पेड़ पर गए। देखते ही देखते वे पेड़ पर चढ़ गए और उन्होंने खूब इमलियाँ खाई। मीना ने एकदम से घड़ी देखी और घबरा कर चिल्लाई, “अरे! स्कूल का टाइम हो गया। जल्दी चलो वरना हैडमास्टर हमें छोड़ेंगे नहीं।” उन सबको कुछ दिन पहले ही हैडमास्टर से डाँट पड़ी थी इसलिए वे घबरा गए।
सभी लड़कियाँ जल्दी-जल्दी पेड़ से नीचे उतरीं और स्कूल की तरफ भागने लगीं। राधा सबसे आखिर में उतरी और उतरते हुए उसके पाँव पर एक काँटा लग गया। वह चिल्लाई, “आह! मीईईई....ना.....! सुनो, मेरे लिए रुको। मुझे चोट लग गई है।” मीना उसकी आवाज़ सुन कर ज़रा देर के लिए रुकी, पीछे मुड़ कर देखा और फिर स्कूल की तरफ भागने लगी। दर्द के मारे राधा के आँसू निकल गए।