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अपने दोस्तों से इन प्रश्नों के बारे में चर्चा करें-

·         इस लड़की के मन में कौन-सी भावनाएँ उमड़ रही हैं?

·         उसे पहले से ही खेल-कूद पसंद है और वह लड़कों के साथ खेलती रही है। अब क्या बदल गया है?

·         उसके घरवाले किस चिंता के कारण उसे खेलने नहीं जाने देते?

·         क्या किशोरावस्था में लड़कों और लड़कियों के प्रति व्यवहार में भेदभाव किया जाता है?

·         क्या इस उम्र की लड़कियाँ खेल-कूद में शामिल होती हैं? वे कौन-से खेल खेलती हैं? क्या उनके घरवाले भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं?

·         इस लड़की को आप क्या सलाह देंगे? वह क्या कर सकती है?

 

एक सुझाव: खेल-कूद लड़कियों के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना कि लड़कों के लिए। तन और मन, दोनों की सेहत के लिए यह ज़रूरी है, खास तौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें खेल-कूद का शौक़ है। यह बात अपने घरवालों को बताएँ। अगर उन्हें आपकी सुरक्षा की चिंता है तो आप अपने जैसी और लड़कियों को जमा कीजिए और साथ खेलने की सुरक्षित जगह ढूँढ़िए। अगर साथ में और भी लड़कियाँ होंगी, तो घरवालों को कम चिंता होगी। फिर शायद अड़ोसी-पड़ोसी भी ताने नहीं मारेंगे।

 

यह सलाह आपको कैसी लगी? यहाँ लिखें।



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